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इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) क्या है?

इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी कि IoT आपके रोज़मर्रा के इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का एक नेटवर्क है। इस नेटवर्क में सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इंटरनेट की सहायता से एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। 

मोबाइल की मदद से पंखा चलाना हो या ऐसी चलाना हो, यह सभी इंटरनेट ऑफ थिंग्स की वजह से संभव है।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स

इंटरनेट ऑफ थिंग्स कैसे काम करता है?

इसके काम करने के लिए IoT सेंसर्स जरूरी होते है। यह सेंसर सभी प्रकार के जरूरी उपकरणों में लगाया जाता है। सेंसर लगे हुए सभी उपकरण एक दूसरे के साथ इंटरनेट के माध्यम से कनेक्ट हो जाते हैं। 

IoT मे कनेक्ट हुए सभी उपकरणों का डाटा एक सेंट्रलाइज्ड सर्वर में रखा जाता है। जिसकी वजह से सभी उपकरण एक दूसरे का डाटा साझा कर सकते हैं।

इसी की मदद से "ऐमज़ॉन इको" या "गूगल होम" जैसे उपकरण आपके कहने पर किसी भी उपकरण को बंद या शुरू कर सकते हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के क्या फायदे है?

  • इसकी मदद से आप कहीं से भी आपके घर के उपकरणों को  इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • मशीनें आपस में डाटा शेयर करके अच्छे से काम कर सकती है।
  • IoT भौतिक उपकरणों को जुड़े रहने और बेहतर संवाद करने की अनुमति देता है। जिससे मशीन द्वारा किए गए काम की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • यह मशीनों को स्वचलन में मदद करता है जिससे काम में एकरूपता आती है।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के क्या नुकसान है?

  • जिस तरह आपके सभी उपकरण इंटरनेट से कनेक्टेड होते हैं,  इन्हें हैक करना आसान हो जाता है।इसकी वजह से हम टेक्नोलॉजी पर और भी निर्भर हो जाते है।
  • इसकी वजह से हम टेक्नोलॉजी पर और भी निर्भर हो जाते है।
  • जिस तरह सभी उपकरणों का डाटा एक सेंट्रल सर्वर पर रखा जाता है, उसे प्राइवेट रखना और भी कठिन हो जाता है।

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