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कंप्यूटर क्या है? सम्पूर्ण जानकारी

इस पोस्ट में हम अध्ययन करेंगे कि कंप्यूटर क्या है और साथ ही में उसकी मूल भाग, कंप्यूटर के आंतरिक भाग, कंप्यूटर की मूल संरचना, कंप्यूटर की कार्यप्रणाली, कंप्यूटर की पीढ़िया और कंप्यूटर के प्रकारो  के बारे में भी पढ़ेंगे।

कंप्यूटर क्या है?

कंप्यूटर की परिभाषा

कंप्यूटर जिसे हिंदी में संगणक भी कहते है एक ऐसा उपकरण (Device) है जो उपयोगकर्ता से इनपुट लेता है, इसे प्रोसेस करता है और उस दिये गए इनपुट के अनुसार आउटपुट तैयार कर के उपयोगकर्ता को देता है।

यह एक मशीन है जिसे डेटा स्वीकार करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। इसमें डेटा को स्टोर करने, पुनः प्राप्त करने और इसे उपयोगी जानकारी में संसाधित करने की क्षमता होती है। 

इनपुट से लेकर आउटपुट तक की प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर द्वारा निर्देशित की जाती है, और हार्डवेयर द्वारा कार्यरत की जाती है।

ज्यादातर कंप्यूटर का उपयोग दस्तावेज़ लिखने, ईमेल भेजने, गेम चलने, वीडियो देखने, वीडियो संपादित करने और वेब ब्राउज़ करने के लिए किया जाता है।

वैसे तो जो कंप्यूट (गणना) करे उसे कंप्यूटर कहते है पर कुछ लोगो के अनुसार कंप्यूटर का फुल फॉर्म है :

Common
Operating
Machine
Purposely
Used for
Technological and
Educational
Research

कंप्यूटर के मूल भाग

डेस्कटॉप कंप्यूटर के मूल भाग कंप्यूटर पेटिका, मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस और पावर कॉर्ड हैं। जब भी आप कंप्यूटर का उपयोग करते हैं, तब प्रत्येक भाग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कंप्यूटर पेटिका

कंप्यूटर पेटिका

कंप्यूटर पेटिका एक धातु और प्लास्टिक बॉक्स है जिसमें कंप्यूटर का मुख्य घटक है, जिसमें मदरबोर्ड, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) और बिजली की आपूर्ति शामिल है। पेटिका के सामने आमतौर पर एक बंद/शुरू बटन (ON/OFF Switch)  और एक या अधिक ऑप्टिकल ड्राइव होते हैं।

कम्प्यूटर पेटिका (Computer Case) के विभिन्न आकार और आकार आते हैं, डेस्कटॉप पेटिका एक डेस्क पर फ्लैट होता है, और मॉनिटर आम तौर पर इसके ऊपर बैठता है। टावर पेटिका लम्बी होती है और मॉनिटर या फर्श पर स्थित है। कुछ कंप्यूटर होते है जिनमे मॉनिटर में ही सारे घटक होते है, ऐसे कंप्यूटरों में कंप्यूटर पेटिका (Computer Case) की आवश्यकता नहीं होती।

मॉनिटर

मॉनिटर

स्क्रीन पर चित्र और पाठ प्रदर्शित करने के लिए, मॉनीटर कंप्यूटर पेटिका के अंदर स्थित एक वीडियो कार्ड के साथ काम करता है। अधिकांश मॉनीटर्स पे कण्ट्रोल बटन्स होते है जो आपको आपके डिस्प्ले की सेटिंग्स बदलने की अनुमति देते है, और कुछ मॉनीटर्स में स्पीकर्स भी होते है।

नए मॉनिटर्स में आमतौर पर एल.सी.डी. (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) या एल.ई.डी. (लाइट इमिटिंग डायोड) प्रदर्शित होता है। इन्हें बहुत पतला बनाया जा सकता है, और इन्हें अक्सर फ्लैट-पैनल दिखाया जाता हैं। पुराने मॉनिटर सी.आर.टी. (कैथोड रे ट्यूब) होते थे। सी.आर.टी मॉनीटर्स बहुत बड़े और भरी थे, और वो डेस्क पे अधिक जगह व्यापन करते थे।

कीबोर्ड

कीबोर्ड

कीबोर्ड एक कंप्यूटर के साथ संवाद करने के मुख्य तरीके में से एक है। कई अलग-अलग प्रकार के कीबोर्ड हैं, लेकिन अधिकांश समान हैं और आपको एक ही बुनियादी कार्य पूरा करने की अनुमति देते है।

माउस

माउस

कंप्यूटर के साथ संचार करने के लिए माउस एक और महत्वपूर्ण उपकरण है। आमतौर पर एक पॉइंटिंग डिवाइस के रूप में जाना जाता है, यह आपको स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट्स को अंकित करने देता है, उन पर क्लिक करने देता है, और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने देता है।

माउस के दो मुख्य प्रकार हैं: ऑप्टिकल और मैकेनिकल ऑप्टिकल माउस आंदोलन का पता लगाने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक आंख का उपयोग करता है और साफ करने में आसान होता है यांत्रिक माउस आंदोलन का पता लगाने के लिए एक रोलिंग बॉल का उपयोग करता है और इसे ठीक से काम करने के लिए नियमित सफाई की आवश्यकता होती है।

कंप्यूटर के आन्तरिक भाग

क्या आपने कभी कंप्यूटर पेटिका के अन्दर देखा है? कुछ कंप्यूटर के आन्तरिक भाग जिन्हें देखके आपको उलझन हो सकती है पर ये जितना कठिन और उलझन भरा दीखता है उतना कठिन और उलझन भरा है नहीं। आइये इसे आसान भाषा में समझते है।


मदर बोर्ड

मदर बोर्ड

मदर बोर्ड कंप्यूटर का मुख्य सर्किट बोर्ड है। यह एक पतली सी प्लेट होती है जो प्रोसेसर, हार्ड डिस्क, आर.ए.एम्., पोर्ट्स (जैसे यु.यस.बी. पोर्ट), और अन्य भागो को जोड़े रखने में काम आती है। कुछ भाग सीधे जुड़ते है तो कुछ भाग परोक्ष रूप से जुड़ते है।

आर.ए.एम्. (रैंडम एक्सेस मेमोरी)

आर.ए.एम्. (रैंडम एक्सेस मेमोरी)

आर.ए.एम्.(रैंडम एक्सेस मेमोरी) ये आपके कंप्यूटर की टेम्पररी(लघु अवधि) मेमोरी होती है। जब भी आपका कंप्यूटर कोई गणना करता है, ये सब जब तक जरुरत हो कंप्यूटर की टेम्पररी मेमोरी में रखा जाता है।

इस टेम्पररी मेमोरी में जो भी होता है सब कंप्यूटर बंद करते ही हट जाता है। अगर आप कोई डॉक्यूमेंट लिख रहे हो तो उसे सेव करना न भूले, नहीं तो कोमुप्टर बंद करते ही आप उसे खो देंगे। जब आप डॉक्यूमेंट सेव करते है तब वह टेम्पररी मेमोरी(आर.ए.एम्.) से पेर्मनंत मेमोरी(हार्ड डिस्क) मे सेव हो जाता है।

आर.ए.एम्. को मेगाबाईट(एम्.बी.) या गीगाबाईट(जी.बी.) में नापा जाता है। आपके कंप्यूटर में जितनी आर.ए.एम्. होगी उतने ही काम आपका कंप्यूटर एक समय में कर सकेगा। अगर आपके कंप्यूटर मे जितनी जरुरत है उतनी आर.ए.एम्. न हो तो आपका कंप्यूटर ज्यादा काम एक समय पर करने पर लटक लटक के और धीमे चलेगा।

प्रोसेसर या सी.पी.यु.

प्रोसेसर या सी.पी.यु.

प्रोसेसर या सी.पी.यु.(सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) कंप्यूटर पेटिका के अन्दर मदर बोर्ड पर लगता है। इसे कंप्यूटर का दिमाग भी कहा जाता है। सी.पी.यु. का काम होता है के वो यूजर ने दिए हुए आदेशो को पूरा करे।

जब भी आप कोई बटन दबाते है, या कोई एप्लीकेशन चलते है, तो आप सी.पी.यु. को आदेश देते है, जिसे पूर्ण करके वह आपको आउटपुट देता है।

सी.पी.यु. आम तौर पर २ इंच की एक सिर्यामिक चौकोन पट्टी होती है जिसमे सिलिकॉन चिप होती है। यह सिलिकॉन चिप आपके अंगूठे के नाख़ून के बराबर होती है।

मदर बोर्ड पे एक सी.पी.यु.(प्रोसेसर) सॉकेट होता है जिसमे सी.पी.यु. फिट हो जाता है। इस सॉकेट के ऊपर एक हीट सिंक होता है जो सी.पी.यु. के तापमान को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होता है।

प्रोसेसर की स्पीड मेगाहर्ट्ज़(एम्.एच.झेड) में जो की मिलियन अनुदेश प्रति सेकंड होते है या फिर गीगाहर्ट्ज़(जी.एच.झेड.) में जो की बिलियन अनुदेश प्रति सेकंड है, में नापी जाती है।

कंप्यूटर की स्पीड सिर्फ प्रोसेसर पे निर्भर नहीं होती, इसके लिए अन्य उपकरण भी जिम्मेदार होते है।

पी.एस.यु. (पॉवर सप्लाई यूनिट)

पी.एस.यु. (पॉवर सप्लाई यूनिट)

पी.एस.यु.(पॉवर सप्लाई यूनिट) ये आपके घर के ए.सी. करंट को कंप्यूटर को लगने वाले करंट में बदल देता है। इसकी वजह से आपका कंप्यूटर जितनी जरुरत है उतनी ही पावर इस्तेमाल करता है। पी.एस.यु. में कंप्यूटर के अन्दर के हर उस भाग जिसको पॉवर लगती है उनके लिए अलग अलग कनेक्षन्स होते है।

अगर आप कभी आपकी कंप्यूटर पेटिका खोले तो आप देखेंगे की सभी भागो को पॉवर पोहचाने वाली वायर्स एक ही डिब्बे से आती है, इसी डिब्बे को पी.एस.यु कहा जाता है। पी.एस.यु. के बाहरी भाग में एक पॉवर पोर्ट होता है जिससे पावर कॉर्ड की मदद से आपके इलेक्ट्रिक बोर्ड से जोड़ा जाता है।

हार्ड डिस्क ड्राइव

हार्ड डिस्क ड्राइव

हार्ड डिस्क ड्राइव मे आपके सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाक्यूमेंट्स, वीडियोस, और अन्य फाइल्स संग्रहित होते है। यह एक दीर्घावधि स्टोरेज(संग्रह) है, जिसका मतलब है की संग्रहित फाइल्स कंप्यूटर बंद करने के बाद भी संग्रहित ही रहती है।

जब आप कोई प्रोग्राम चलते है, या फिर कोई फाइल खोलते है तो हार्ड ड्राइव में से वहा डेटा आर.ए.एम्. में आ जाता है, और जब आप उस फाइल में कुछ बदलाव करके उसे फिर से सेव करते है तो वह डेटा फिर से हार्ड ड्राइव में सेव हो जाता है।

विस्तार कार्ड्स

प्रत्येक मदर बोर्ड में विस्तार स्लॉट्स होते है जिनमे विस्तारित भाग जोडके आपके कंप्यूटर की शमता को बढाया जा सकता है। इन विस्तार भागो में विडियो कार्ड, ऑडियो कार्ड, नेटवर्क कार्ड भी होते है पर ज्यादातर मदर बोर्ड में ये कार्ड पहले से ही होते है, जिसकी वजह से इन कार्ड्स को बहार से लगाने की जरुरत नहीं पड़ती।

पर अगर आप उन दिए गए विडियो या ऑडियो कार्ड से संतुष्ट न हो तो आप उनकी क्षमता विस्तार कार्ड्स लगाकर बढ़ा सकते है। चलिए कुछ ज्यादातर इस्तेमाल होने वाले विस्तार कार्ड्स को देख लेते है:

विडियो कार्ड

विडियो कार्ड

विडियो कार्ड की वजह से ही आप आपके मॉनिटर पे के चित्रों को देख सकते है। बोहोत से कंप्यूटरों में जी.पी.यु.(ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट) पहले से ही मदर बोर्ड मे होता है।

पर अगर आप बड़े गेम्स खेलना चाहते हो तो आपको अलग से बड़ी प्रोसेसिंग क्षमता वाला विडियो कार्ड लगाना होता है जिसे ग्राफ़िक्स कार्ड भी कहते है। यह विडियो कार्ड आपके मदर बोर्ड मे दिए पोर्ट मे फिट हो जाता है।

साउंड कार्ड

साउंड कार्ड

साउंड कार्ड जिसे ऑडियो कार्ड भी कहा जाता है, इसकी मदद से आप आपके कंप्यूटर पे गाने, या ऑडियो सुन सकते है। आपके कंप्यूटर मे पहले से ही साउंड कार्ड लगा होता है पर वहा बेसिक होता है और आप उसपे साउंड एडिटिंग या मोडुलेशन नहीं कर सकते। ऐसे वक्त पे आपको एक अच्छे साउंड कार्ड की आवश्यकता होती है, जो की आप विस्तृत साउंड कार्ड लगाकर पूरी कर सकते है।


नेटवर्क कार्ड

नेटवर्क कार्ड

नेटवर्क कार्ड आपके कंप्यूटर को नेटवर्क में स्थित कंप्यूटरो के साथ संवाद करने में सक्षम बनाते है और आपको इन्टरनेट से जोड़ता है। इसे आप या तो ईथरनेट केबल से जोड़ सकते है या फिर वायरलेस कनेक्शन जिसे वाय.फाय.(वायरलेस फिडेलिटी) कहते है, उससे जोड़ सकते है। बोहोत से मदर बोर्ड्स में पहले से ही नेटवर्क कार्ड स्थित होता है।

ब्लूटूथ एडॉप्टर

ब्लूटूथ एडॉप्टर

ब्लूटूथ एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो की कम दुरी वाले संचार के लिए इस्तेमाल होती है। यह ज्यादातर कंप्यूटरो मे वायरलेस कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर्स के साथ संवाद करने में इस्तेमाल होती है। यह ज्यादातर लैपटॉप कंप्यूटर में होता है, पर आप इसे ब्लूटूथ अडाप्टर या ब्लूटूथ कार्ड की मदद से अपने डेस्कटॉप कंप्यूटर में भी लगा सकते है।

कंप्यूटर की मूल संरचना

कंप्यूटर सिस्टम को डेटा हैंडलिंग के चार मुख्य पहलुओं की आवश्यकता होती है। इनपुट, प्रोसेसिंग, आउटपुट और स्टोरेज जिसे आप निचे दी गयी तस्वीर में देख सकते है।

कंप्यूटर की मूल संरचना

इनपुट, प्रोसेसिंग, आउटपुट और स्टोरेज इन चार क्षेत्रों की मदद से हमारा कंप्यूटर काम करता है।

इनपुट डिवाइस

ये डाटा को यूजर से ऐसे रूप में लेता है जिसे कंप्यूटर समझ और इस्तेमाल कर सके, और फिर उसे प्रोसेसिंग यूनिट की तरफ भेज देता है।

प्रोसेसर

प्रोसेसर जिसे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) भी कहते है, उसमे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते है। यह सर्किट जो डाटा दिया जाता है उस डाटा को सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में दिए निर्देशों द्वारा निष्पादित (Process) करता है।

आउटपुट डिवाइस

यह लोगों को संसाधित (Processed) डेटा जानकारी एक ऐसे रूप में दिखाता है जिसे वे समझ सकते हैं।

स्टोरेज डिवाइस

यह ऐसे डिवाइस होते है जिनमे प्रोसेसिंग के वक़्त और प्रोसेसिंग के बाद का डाटा स्टोर होता है। इनमे टेम्पररी (Volatile) और पर्मनंट (Non-Volatile) ऐसे दो प्रकार होते है। टेम्पररी याने आपके कंप्यूटर की RAM जिसमे प्रोसेसिंग के वक़्त डाटा स्टोर होता है, और पर्मनंट याने आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क ड्राइव जिसमे पर्मनंट डाटा स्टोर होता है।

कंप्यूटर की बुनियादी कार्यप्रणाली

कंप्यूटर की बुनियादी कार्यप्रणाली

कंप्यूटर की कार्यप्रणाली काफी सरल है, यह उपयोगकर्ता द्वारा दिये गए इनपुट को इनपुट डिवाइस की मदद से लेता है। फिर उस इनपुट को ऑपरेटिंग सिस्टम में दी गयी इंस्ट्रक्शंस के अनुसार CPU की मदद से प्रोसेस करता है। और अंत में उस प्रोसेस के रिजल्ट को आउटपुट के रूप में उपयोगकर्ता को देता है।

इन सभी प्रक्रियाओं में कंप्यूटर का सबसे जरुरी भाग होता है उसका CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट)। जिस तरह इंसानी दिमाग काम करता है, उसी तरह CPU कंप्यूटर का दिमाग होता है।

चलिए कंप्यूटर की कार्य प्रणाली को थोड़ा और सविस्तार से जान लेते है ;

इनपुट यूनिट (IU)

यह कंप्यूटर की सबसे पहली और जरुरी प्रक्रिया है, इसके बिना कंप्यूटर प्रोसेसिंग नहीं कर सकता। इनपुट यूनिट की मदद से उपयोगकर्ता कंप्यूटर को इनपुट देता है, यह इनपुट हाई लेवल लैंग्वेज (उपयोगकर्ता को समझने वाली भाषा) में होता है।

इस इनपुट को कंप्यूटर, ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से लौ लेवल लैंग्वेज (बाइनरी लैंग्वेज) में बदलता है। अब यह इनपुट सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)

यहाँ पर दिए गए इनपुट को सबसे पहले टेम्पररी मेमोरी में रखकर इसे अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट में भेजा जाता है। अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट में इनपुट अरिथमैटिक है या लॉजिक है देख कर प्रोसेस किया जाता है।

प्रोसेसिंग की प्रक्रिया होने के बाद कण्ट्रोल यूनिट आउटपुट को तैयार कर के उपयोगकर्ता को दे देता है।

अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट (ALU)

दिए गए इनपुट डाटा को कंप्यूटर, मेमोरी में रखकर प्रोसेसिंग शुरू कर देता है। दिया गया इनपुट डाटा नंबर, अक्षर या चिन्ह है इस बात का निर्णय करने का काम अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट करता है।

अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट दिए गए इनपुट की तुलना या गणना करने का काम करता है। तुलना जैसे 'AND (और), OR (या)' और गणना जैसे 'गुणाकार, भागाकार, जोड़  और वजा' करना।

कण्ट्रोल यूनिट (CU)

इसके नामानुसार यह सभी प्रक्रियाओ को नियंत्रित (control) करने का काम करता है। कण्ट्रोल यूनिट डाटा और जानकारी को CPU की सूचनाओं के अनुसार नियंत्रित करता है।

कण्ट्रोल यूनिट उपयोगकर्ता से इनपुट लेने से लेकर उपयोगकर्ता को आउटपुट देने तक की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

सेकेंडरी स्टोरेज (Secondary Storage)

मुख्य मेमोरी की कुछ कमियों के कारन कंप्यूटर सिस्टम को सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस की जरुरत होती है। सेकेंडरी मेमोरी एक अतिरिक्त मेमोरी स्टोरेज की तरह काम कर के प्राइमरी मेमोरी को अप्रत्यक्ष रूप से डाटा स्टोर करने में मदद करती है। इसी कारन सेकेंडरी स्टोरेज को ऑक्सिलिअरी मेमोरी (Auxiliary Memory) भी कहते है।

कुछ उपकरण जैसे हार्ड डिस्क (HDD), फ्लॉपी डिस्क (FDD), कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) और मगेंटिक डिस्क कंप्यूटर सिस्टम में सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस की तरह काम करते है।

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ

प्रथम पीढ़ी: कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी वेक्यूम ट्यूब्स की थी जो 1940 से लेके 1956 तक चली। इस पीढ़ी में सर्किट में वेक्यूम ट्यूब और मेमोरी के लिए मैग्नेटिक ड्रम का इस्तेमाल किया गया था।

द्वितीय पीढ़ी : कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी ट्रांजिस्टर की थी जो 1956 से लेके 1963 तक चली। ट्रांजिस्टर को 1947 में बनाया गया था और इन्हें वेक्यूम ट्यूब की जगह बदल दिया था।

तृतीया पीढ़ी : कंप्यूटर की तृतीया पीढ़ी इंटीग्रेटेड सर्किट की थी जो 1964 से 1971 तक चली। बेशक ट्रांजिस्टर वेक्यूम ट्यूब से काफी बेहतर थी पर फिर भी वह बहुत गर्म हो जाते थे जिसकी वजह से कंप्यूटर को हानि होती थी।

चतुर्थ पीढ़ी : कंप्यूटर की चतुर्थ पीढ़ी माइक्रो प्रोसेसर की है जो 1971 से अब तक चल रही है। इंटीग्रेटेड सर्किट के बाद इस चित्र में एक ही बात हो सकती थी और वह थी कंप्यूटर के कंपोनेंट को और छोटा करना।

पंचम पीढ़ी : कंप्यूटर की पंचम पीढ़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की है जो अभी भी निर्माण हो रही है। हम इस टेक्नोलॉजी की झलक आज के आवाज़ पहचानने वाले यानी कि वॉइस रिकॉग्निशन सिस्टम में देख सकते हैं।

कंप्यूटर की पीढ़ियों की संपूर्ण जानकारी के लिए यह लेख पढ़े: कंप्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer in Hindi)

कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

हार्डवेयर:

विभिन्न प्रकार के कंप्यूटरों के बारे में बात करने से पहले, हम दो चीजों के बारे में बात करते हैं जो सभी कंप्यूटरों में समान हैं: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर।

आपके कंप्यूटर का कोई भी शारीरिक संरचना वाला हिस्सा हार्डवेयर है, जैसे कि कीबोर्ड या माउस इसमें कंप्यूटर के सभी आंतरिक हिस्सों को भी शामिल किया गया है, जिसे आप नीचे दी गई छवि में देख सकते हैं।

सॉफ़्टवेयर:

सॉफ़्टवेयर निर्देशों का एक ऐसा संग्रह है जो बताता है कि हार्डवेयर को क्या और कैसे करना है। सॉफ्टवेयर के उदाहरणों में वेब ब्राउज़र, गेम, और वर्ड प्रोसेसर शामिल हैं। नीचे, आप सॉफ्टवेयर की एक छवि देख सकते हैं, जिसका प्रयोग प्रस्तुतियां बनाने के लिए किया जाता है।

कंप्यूटर के प्रकार

​कंप्यूटर के ​​६ मुख्य प्रकार होते है, इस पोस्ट में हम उन सभी जरुरी कंप्यूटर के प्रकार के बारे में जानेंगे।

​१. सुपर कंप्यूटर

सुपर कंप्यूटर

सुपरकंप्यूटर साधारण कंप्यूटर से अलग सबसे महंगे और तेज़ कंप्यूटर होते हैं। यह विशाल कंप्यूटर बहुत जटिल विज्ञान और इंजीनियरिंग की समस्याओं को हल करने के लिए इस्तेमाल होते है।

समानांतर प्रसंस्करण (Parallel Processing) का लाभ उठाकर सुपर कंप्यूटर अपनी प्रसंस्करण शक्ति (Processing Power) प्राप्त करते हैं; वे एक समस्या पर एक ही समय में प्रोसेसर का उपयोग पूरी तरह करते हैं, एक सुपर कंप्यूटर एक समय में दस लाख खरब गणना कर सकता है।

२. सर्वर कंप्यूटर

सर्वर कंप्यूटर

सर्वर कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर से अलग है, सर्वर कंप्यूटर बहुत ही जटिल समस्याओ को हल करने के बजाय, बोहोत सी छोटी छोटी और सामान समस्याओ को हल करते है। उदाहरण के तौर पर आप किसी भी बड़ी वेबसाइट के कंप्यूटर को सर्वर कंप्यूटर कह सकते है।

उन कंप्यूटरों को आप वेबसाइट का जो पन्ना ढूंड रहे है उस पन्ने को ढूंड कर आपको भेजना होता है। सोचने के लिए यह बोहोत बड़ी बात नहीं है, पर यह काम सर्वर के लिए जटिल होता है, क्युकी उसे कंप्यूटर के बोहोत से पन्नो को बोहोत से लोगो के लिए ढूंडना होता है और उन्हें सही जगह भेजना होता है।

कुछ सर्वर, जैसे की गूगल इस्तेमाल करता है गूगल डाक्यूमेंट्स के लिए, इनमे फाइल्स के साथ साथ एप्लीकेशन्स भी होती है।

सर्वर मे बोहोत सारा डेटा और बोहोत सारे प्रोग्राम्स होते है। इसे नेटवर्क सर्वर भी कहा जाता है, यह सिस्टम सभी जुड़े हुए उपयोगकर्ताओ को डेटा भेजने या संगृहीत करने की अनुमति देता है। फ़ाइल सर्वर और एप्लीकेशन सर्वर ये सर्वर कंप्यूटर के दो महत्वपूर्ण प्रकार है।

३. वर्कस्टेशन कम्प्यूटर

वर्कस्टेशन कम्प्यूटर

वर्कस्टेशन उच्च प्रति के महेंगे कंप्यूटर होते है जो ज्यादा कठिन और जटिल कार्यो को करने के लिए इस्तेमाल होते है, यह कंप्यूटर एक समय एक उपयोगकरता के लिए होते है।

जटिल कामो में जैसे अभियांत्रिकी गणना करने के लिए इस कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है। वर्कस्टेशन कंप्यूटर आम तौर पर बेचे नहीं जाते थे, पर अब यह बात बदल रही है और साधारण लोग भी इसे इस्तेमाल कर पा रहे है।

४. पर्सनल कंप्यूटर या पी.सी.

पर्सनल कंप्यूटर

पी.सी. एक पर्सनल कंप्यूटर के लिए संक्षिप्त नाम है, इसे माइक्रो कंप्यूटर भी कहा जाता है। इसकी भौतिक विशेस्ताए और कम लागत आकर्षक हैं और ये उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी हैं। इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर की शुरूआत के बाद से निजी कंप्यूटर की क्षमताओं में बहुत बदलाव आया है।

१९७० के दशक के शुरूआती वर्षों में, अकादमिक या अनुसंधान संस्थानों में लोगों को पर्सनल कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करने का मौका मिला, फिर भी यह कंप्यूटर एक व्यक्ति के खरीदने के लिए बोहोत मेहेंगे थे।

माइक्रोप्रोसेसर के आजाने से, जो एक चिप था, जिस मे सारे सर्किट जो ज्यादा बड़े थे और मेहेंगे थे कम लगत में मिलने लगे, जिसकी वजह से १९७५ में पर्सनल कंप्यूटरों का प्रसार हुआ।

प्रारंभिक पर्सनल कंप्यूटर अक्सर किट फॉर्म में और सीमित मात्रा में बेचे जाते थे, और ज्यादातर शौकियों और तकनीशियनों के लिए बनाये जाते थे। १९७० के दशक के अंत तक बड़े पैमाने पर बाजार में बने-बनाये कंप्यूटर आन लगे, जिसकी वजह से लोग कंप्यूटरों को अपने निजी कामो के लिए इस्तेमाल करने लगे। सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों पर अधिक और प्रोसेसर हार्डवेयर के विकास पर कम ध्यान केंद्रित करके इन कंप्यूटर को कम कीमत में बनाया जाने लगा।

१९७० और १९८० के दशक के दौरान घरेलू कंप्यूटर घरेलू उपयोग के लिए विकसित किए गए थे, कुछ व्यक्तिगत उत्पादकता, प्रोग्रामिंग और गेम की पेशकश करते हुए, जबकि कुछ बड़े और अधिक महंगे सिस्टम (फिर भी मिनी कंप्यूटरों और मेनफ़्रेम कंप्यूटरों से सस्ते) कार्यालय और छोटे व्यवसाय के उपयोग के उद्देश्य से।

आज पी.सी. एक ऐसा उपकरण है जिसे आप गेमिंग के लिए, मीडिया सर्वर की तरह, अपने कामो को तेज़ी से करने और अपनी उत्पादकता बढ़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते है। इस कंप्यूटर का मॉड्यूलर निर्माण करने की वजह से अगर इसका कोई हिस्सा ख़राब हो जाए या टूट जाए तो उसे आप आसानी से बदल या अपग्रेड कर सकते है।

५. माइक्रोकन्ट्रोलर

माइक्रोकन्ट्रोलर

माइक्रो कन्ट्रोलर मिनी कंप्यूटर हैं जो उपयोगकर्ता को डेटा संग्रहीत करने और सरल आदेश देने और कार्य निष्पादित करने की अनुमति देता है। इस सिंगल सर्किट डिवाइसेस में कम मेमोरी होती है, लेकिन ये जरुरी कार्य करने के लिए काफी होती है।

ऐसे कई सिस्टम जिनमे माइक्रो कंट्रोलर इस्तेमाल होता है उन्हें एम्बेडेड सिस्टम के रूप में जाना जाते है। आपकी कार का कंप्यूटर भी माइक्रो कंट्रोलर से बना है, और उसे एम्बेडेड सिस्टम कहा जाता है। उदाहरण के लिए एक आम माइक्रोकंट्रोलर “आर्डिनो” जिसे ज्यादातर लोग जानते है।

६. स्मार्टफ़ोन

स्मार्टफ़ोन

​क्या आपके पास एक स्मार्टफोन है? आपका स्मार्ट फोन एक कंप्यूटर है! अधिकांश स्मार्टफ़ोन आई.ओ.एस. या एंड्रॉइड चलाते हैं, एंड्रॉइड एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो लिनक्स पर आधारित है। स्मार्टफ़ोन तेजी से तेज़ होते जा रहे हैं और इसमें एक तेजी से बढ़ती डेटा क्षमता भी है।

निष्कर्ष: आशा करता हु के इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपने कंप्यूटर क्या है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर ली होगी। अगर आपको लगता है के इस जानकारी में कुछ कमी है तो आप हमें निचे कमेंट कर के जरुर बताये।

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